পশ্চিমবঙ্গে নির্বাচন পরবর্তী হিংসা বিষয়ে রাষ্ট্রীয় স্বয়ংসেবক সঙ্ঘের মাননীয় সরকার্যবাহ শ্রী দত্তাত্রেয় হোসাবালেজীর বক্তব্য : – Statement by Shri Dattatreya Hosabale, Sarkaryavah, Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)

Elections have a significant role in democracy. In this tradition, very recently polls for Assembly were conducted in West Bengal. The entire society of Bengal has vehemently participated in the same. It is but natural that the opposing sides, in the fit of emotions, sometimes cross the limits in making allegations and counter allegations. However, we should always remember that all contesting parties belong to our country only and all those participating in the elections-the candidates, their supporters, the voters-are citizens of the nation.

But the violence unleashed state wide, soon after the election results came out, is not only highly condemnable but appears to be well conspired also.

The anti social elements active in this abhorring violence, misbehaved with womenfolk in most barbaric and despicable manner, brutally killed the innocent people and torched the houses, shamelessly looted the shops and malls; and, as a result of the unabated violence, thousands of people including a large number brethren of scheduled castes and tribes, who became shelterless, were forced to go in search of refuge to save their lives and honour. Everywhere from Coochbehar to Sundarbans, there is a widespread fear psychosis among the common people.

The RSS condemns this gruesome violence in severest terms. It is our considered opinion that this post-poll-result violence is contrary to the Bharatiya tradition of Co-existence and respect to the opinion of all, as also it is totally opposed to the very spirit of democracy and one people enshrined in our Constitution.

That the role of state administrative machinery was completely passive and they remained mute spectators was the most heinous part of this unabated and inhuman violence. Neither the rioters are seemed to be afraid of anything nor is there any initiative by the state police and administration to control the violence.

The first and foremost responsibility of the ruling administration, whoever or whichever party may be in power, is to establish peace and safety in the society by maintaining law and order, to instil fear of law in the minds of the anti social elements, and to punish those involved in violent activities. The electoral victory belongs to political parties, but the elected government is accountable to the entire society.

We demand the newly elected government of West Bengal, as its top priority, to effectively establish rule of law by immediately containing violence, to initiate legal action against culprits by arresting them without further delay and also to instil a feeling of safety and confidence in the minds of affected people, and to take necessary steps for their rehabilitation. We also urge upon the Union Govt to take necessary and all possible steps to establish peace in WB and to ensure that state Govt acts in the above direction.

The RSS appeals to all the intelligentsia, the socio-religious and political leadership to play their significant role to arouse a feeling of trust and standing by the suffering sections of the society in this hour of crisis, to condemn the violence unequivocally, and also help create an atmosphere of peace, goodwill and harmony.

গণতন্ত্রে নির্বাচনের উল্লেখযোগ্য ভূমিকা রয়েছে। এই পরম্পরা অনুসারে সম্প্রতি পশ্চিমবঙ্গে বিধানসভার নির্বাচন অনুষ্ঠিত হয়েছে। বাঙালী সমাজ ব্যাপকভাবে এই নির্বাচনে অংশ নিয়েছে। বিরোধী পক্ষের অভিযোগ ও পাল্টা অভিযোগের মধ্যে নির্বাচন প্রক্রিয়া চলে, তার মধ্যে কখনো বা আবেগের বশে সীমা অতিক্রম করে ফেলাটা খুবই স্বাভাবিক। তবে আমাদের সর্বদা মনে রাখা উচিত যে সমস্ত প্রতিদ্বন্দ্বী দলগুলি আমাদের দেশেরই দল এবং নির্বাচনে অংশ নেওয়া সমস্ত প্রার্থী, তাদের সমর্থক, ভোটাররা এই দেশেরই নাগরিক।

তবে নির্বাচনের ফলাফল প্রকাশের পরপরই রাজ্যে যেভাবে ব্যাপক হিংসা প্রকাশ পেয়েছে , তা তীব্র নিন্দনীয় তো বটেই, এটি ষড়যন্ত্রমূলক বলেও মনে হচ্ছে।

সমাজবিরোধী এই গুন্ডারা বর্বর ও ঘৃণ্য উপায়ে মহিলাদের সাথে দুর্ব্যবহার করেছে, নির্দোষ মানুষকে নির্মমভাবে হত্যা করেছে এবং বাড়িঘর জ্বালিয়ে দিয়েছে, নির্লজ্জভাবে দোকান ও বাজার লুট করেছে। এই নিরবচ্ছিন্ন উৎপীড়নের ফলস্বরূপ হাজার হাজার তপসিলি জাতি ও উপজাতির ভাইসহ বহু সাধারণ মানুষ আশ্রয়হীন হয়ে পড়েছেন। জীবন ও সম্মান বাঁচাতে তারা নতুন আশ্রয়ের সন্ধানে বাধ্য হয়েছেন । কোচবিহার থেকে সুন্দরবন পর্যন্ত সর্বত্রই সাধারণ মানুষের মধ্যে ব্যাপক ভীতি এবং আতঙ্ক দেখা দিয়েছে।

রাষ্ট্রীয় স্বয়ংসেবক সঙ্ঘ এই ভয়ানক হিংসার কঠোর নিন্দা করছে। আমাদের বিবেচিত মতামত এই যে নির্বাচন পরবর্তী এই হিংসা সহাবস্থান এবং সর্বমত-শ্রদ্ধার ভারতীয় ঐতিহ্যের পরম্পরার পরিপন্থী,পাশাপাশি এই হিংসা গণতান্ত্রিক চেতনার এবং সংবিধানের সম্পূর্ণ বিরোধী।

রাজ্য প্রশাসনের নিষ্ক্রিয়তা এবং নীরব দর্শকের ভূমিকা পালন, এই নিরবচ্ছিন্ন ও অমানবিক সহিংসতার সবচেয়ে জঘন্যতম অংশ। দাঙ্গাবাজরা যেমন কোনও কিছুরই তোয়াক্কা করছে না,তেমনি রাজ্য পুলিশ ও প্রশাসনও কোনো পদক্ষেপ নিচ্ছে না।

ক্ষমতাসীন প্রশাসনের সর্বপ্রথম দায়িত্ব, যে কেউ বা যে কোনও পক্ষই ক্ষমতায় থাকুক না কেন আইন-শৃঙ্খলা বজায় রেখে সমাজে শান্তি ও সুরক্ষা প্রতিষ্ঠা করা, সমাজবিরোধীদের মনে আইনের প্রতি ভয় জাগানো এবং সহিংস কর্মকাণ্ডে জড়িতদের শাস্তি দেওয়া । নির্বাচনী বিজয় রাজনৈতিক দলগুলির হলেও, নির্বাচিত সরকার সমগ্র সমাজের কাছে দায়বদ্ধ।

আমরা পশ্চিমবঙ্গের নবনির্বাচিত সরকারকে দাবি জানাচ্ছি , অবিলম্বে হিংসা বন্ধ করে কার্যকরভাবে আইনের শাসন প্রতিষ্ঠা করা হোক, আর দেরি না করে এই অসামাজিক তত্ত্বকে গ্রেপ্তার করে আইনানুগ ব্যবস্থা গ্রহণ করা হোক যাতে সাধারণ নাগরিকের মধ্যে সুরক্ষা ও আত্মবিশ্বাসের অনুভূতি জাগিয়ে তোলা যায়। রাজ্যসরকারের উচিত ক্ষতিগ্রস্থদের পুনর্বাসনের জন্য প্রয়োজনীয় পদক্ষেপ গ্রহণ করা।

কেন্দ্রীয় সরকারের কাছে আমাদির আবেদন যাতে এই রাজনৈতিক হিংসা শেষ করতে প্রয়োজনীয় এবং সম্ভাব্য সকল পদক্ষেপ গ্রহণ করা হয় এবং যাতে রাজ্য সরকার উপরোক্ত দিকগুলিতে কাজ করে তা নিশ্চিত করা হয়।

আরএসএস সমস্ত বুদ্ধিজীবী, সামাজিক-ধর্মীয় ও রাজনৈতিক নেতৃত্বের কাছে আহ্বান করছে, সঙ্কটের এই সময়ে এই হিংসার তীব্র নিন্দা করে সমাজের অত্যাচারিত মানুষদের পাশে দাঁড়ানোর জন্য সদর্থক ভূমিকা পালন করুন এবং রাজ্যে শান্তি, সদিচ্ছা ও সম্প্রীতির পরিবেশ তৈরি করতে সাহায্য করুন।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वीभत्स हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करता है। दत्तात्रेय होसबाले (सरकार्यवाह)

लोकतंत्र में चुनावों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चुनावों के इसी क्रम में पश्चिम बंगाल का चुनाव अभी-अभी सम्पन्न हुआ है। बंगाल के सम्पूर्ण समाज ने इसमें बढ़-चढ़ कर सहभाग लिया है। चुनावों में स्वाभाविक ही पक्ष-विपक्ष, आरोप-प्रत्यारोप कभी-कभी भावावेश में मर्यादाओं को भी पार कर देता है। पर, हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि सभी दल अपने ही देश के दल हैं और चुनावों की प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्याशी, समर्थक, मतदाता सभी अपने ही देश के नागरिक हैं।

चुनाव परिणाम के तुरंत बाद उन्मुक्त होकर अनियंत्रित तरीक़े से हुई राज्यव्यापी हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि पूर्व नियोजित भी है। समाज-विघातक शक्तियों ने महिलाओं के साथ घृणास्पद बर्बर व्यवहार किया, निर्दोष लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्याएँ कीं, घरों को जलाया, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-दुकानों को लूटा एवं हिंसा के फलस्वरूप अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के बंधुओं सहित हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर होकर प्राण-मान रक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण के लिए मजबूर हुए हैं। कूच-बिहार से लेकर सुंदरबन तक सर्वत्र जन सामान्य में भय का वातावरण बना हुआ है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वीभत्स हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करता है। हमारा यह सुविचारित मत है कि चुनाव-परिणामों के पश्चात अनियंत्रित चल रही हिंसा भारत की सह-अस्तित्व और सबके मतों का सम्मान करने की परंपरा के साथ-साथ भारतीय संविधान में अंकित एक जन और लोकतंत्र की मूल भावना के भी विपरीत है।

इस पाशविक हिंसा का सर्वाधिक दुखद पक्ष यह है कि शासन और प्रशासन की भूमिका केवल मूक दर्शक की ही दिखाई दे रही है। दंगाइयों को ना ही कोई डर दिखाई दे रहा है और ना ही शासन-प्रशासन की ओर से नियंत्रण की कोई प्रभावी पहल दिखाई दे रही है।

शासन-व्यवस्था कोई भी हो, किसी भी दल की हो, उस का सर्वप्रथम दायित्व समाज में क़ानून-व्यवस्था के द्वारा शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाना, अपराधी और समाज-विरोधी तत्वों के मन में शासन का भय पैदा करना और हिंसक गतिविधियाँ करने वालों को दंड सुनिश्चित करना होता है। चुनाव को दल जीतते हैं, पर, निर्वाचित सरकार पूरे समाज के प्रति जवाबदेह होती है। हम नव निर्वाचित सरकार से यह आग्रह करते हैं कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में चल रही हिंसा को तुरंत समाप्त कर क़ानून का शासन स्थापित करना, दोषियों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना, हिंसा-पीड़ितों के मन में विश्वास और सुरक्षा का भाव पैदा कर पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाना, होनी चाहिए। हम केंद्र सरकार से भी आग्रह करते है कि वह बंगाल में शान्ति क़ायम करने हेतु आवश्यक हर सम्भव कदम उठाए एवं यह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकार भी इसी दिशा में कार्रवाई करे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के सभी प्रबुद्ध जनों, सामाजिक-धार्मिक-राजनैतिक नेतृत्व का भी आहवान करता है कि इस संकट की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हो कर विश्वास का वातावरण बनाएं, हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करें एवं समाज में सद्भाव और शांति व भाईचारे का वातावरण खड़ा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायें।


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